मीरा का भजन. मीरा बाई 2019-12-05

मीरा बाई की जीवनी

मीरा का भजन

Meera Ke Pad Bhajan In Hindi— हिंदी और राजस्थानी भाषा की भक्त कवियित्री ने अपना सम्पूर्ण जीवन कृष्ण भक्ति में ही गुजार दिया था. मानते हैं और कुछ 1498 ई. Meera Bai Biography and Bhajan in Hindi Meera Bai Biography and Bhajan in Hindi मीरा बाई की जीवनी और भजन Meera Bai मीराबाई 1498 — 1547 एक राजपूत राजकुमारी थी जो उत्तरी भारत के राजस्थान राज्य में रहती थी मीराबाई भगवान कृष्ण की भक्त थी और मीराबाई को प्रेमभक्ति का अग्रणी प्रतिपादक कहा जाता है उन्होंने कृष्ण की प्रशंशा में व्रज भाषा और राजस्थानी भाषा में भजन गाये थे Meera Bai मीरा बाई का जन्म 1504 ईस्वी में राजस्थान के मेड़ता जिले के चौकरी गाँव में हुआ था Meera Bai के पिता रतन सिंह. कोई कहता हैं, अपने प्रियतम को चुपचाप बिना किसी को बताए पा लिया हैं. मुझे दर्शन देने के लिए आपने पुनर्जन्म लेने का वादा कर रखा हैं.

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मीरा का भजन

मीरा विष का प्याला पीगी जी, रामनाम की बैठ जहाज में, पार उतर गई रे, मीरा जहर का प्याला पीगी जी, राम नाम को तिलक लगाकर, पार उतर गई रे।। जहर प्याला राणा न भेेज्या, देवो मीरा न जाय, कर चरनामत मीरा पिगई, तू जाने नन्दलाल, मीरा जहर का प्याला पीगी जी, राम नाम को तिलक लगाकर, पार उतर गई रे।। साप टिपरा राणा न भेज्या, देज्यो मीरा ने जार, अर खोल टिपारो देखन लागी, बनग्यो नोसर हार, मीरा जहर का प्याला पीगी जी, राम नाम को तिलक लगाकर, पार उतर गई रे।। राणो मीरा पर कोपियो जी, ले नागी तलवार, एक मीरा न मारे मीरा, बने हजार, मीरा जहर का प्याला पीगी जी, राम नाम को तिलक लगाकर, पार उतर गई रे।। मीरा बाई की विनती जी, सुन्नियों सब संसार, भक्ति का प्रताप से जी, गुरु लिया रैदास, मीरा जहर का प्याला पीगी जी, राम नाम को तिलक लगाकर, पार उतर गई रे।। मीरा विष का प्याला पीगी जी, रामनाम की बैठ जहाज में, पार उतर गई रे, मीरा जहर का प्याला पीगी जी, राम नाम को तिलक लगाकर, पार उतर गई रे।। Singer — Sawari Bai प्रेषक — शंकर लाल बडगुर्जर +919351988831. मीरा बाई के पद 3 मैंने राम रत्न धन पायों बसत अमोलक दी मेरे सद्गुरु, करि कृपा अपणायो जन्म-जन्म की पूंजी पाई. यह जो तुम्हारा शरीर हैं इस पर बेमतलब गर्व कर रहे हो, यह भी एक दिन मिटटी के साथ मिल जाएगा. तारे गिन गिन रैन बिहानी सुख: की घड़ी कब आवे मीरा के प्रभू गिरधर नागर जब मोहे दरस दिखावे मैं बिरहिन बैठी…… मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई छांड़ी दई कुलकी कानि कहा करिहै कोई संतन ढिग बैठि बैठि लोक लाज खोई चुनरी के किये टूक ओढ़ लीन्ही लोई मोती मूंगे उतार बनमाला पोई अंसुवन जल सीचि सीचि प्रेम बेलि बोई अब तो बेल फैल गई आंनद फल होई दूध की मथनियां बड़े प्रेम से बिलोई माखन जब काढ़ि लियो छाछ पिये कोई भगति देखि राजी हुई जगत देखि रोई दासी मीरा लाल गिरधर तारो अब मोही शब्दार्थ: कानि- इज्जत, मान, लाज, परंपरा संतन ढिग- संतों के साथ बैठ कर यहा मीरां रैदास के बारे में कहना चाहती है जो जन्म से चमार थे, जूते बनाते हुए भजन गाते थे,परन्तु बहुत ही माने हुए विद्वान संत थे लोई- एक प्रकार का कंबल मथनियां: एक प्रकार का पात्र जिसमें गाँवों में आज भी दही बिलो कर मक्खन निकाला जाता है। मीरां बाई किसी भी हिन्दी प्रेमी के लिये अन्जाना नाम नहीं है। राजस्थान के मेड़ता की इन महान कवियत्री, संत, गायिका ने कृष्ण की भक्ति में डूब कर जो रचनायें हमें दी है, वह अनमोल है। मीरां बाई की रचनायें शुद्ध सरल राजस्थानी, हिन्दी और गुजराती में है। सामान्य हिन्दी जानने वाला कोई भी इन रचनाओं को आसानी से समझ सकता है। यह मेरी तरफ़ से एक छोटा सा प्रयास है कि मीरां बाई की रचनाओं को एकत्रित कर आप के सामने एक संकलन प्रस्तुत कर रही हूँ, मेरे इस प्रयास में आप सबके सहयोग की आवश्यकता होगी सो आप इन रचनाओं के अलावा कोई और रचना जानतें हों तो मुझे मेरे मेल पर अवश्य भेजें, यहाँ आप के नाम के साथ प्रकाशित की जायेगी। कोई मानदेय की व्यवस्था नहीं है व्याकरण कि गल्तियाँ होनी स्वाभाविक है सो आप से अनुरोध है कि उनके लिये आप बेहिचक लिखें। धन्यवाद निर्मला सागर. में मीरा के नाम से चित्तौड़ के मंदिर में गिरिधरलाल की मूर्ति स्थापित हुई। यह मीरा का स्मारक और उनके इष्टदेव का मंदिर दोनों था। गुजरात में मीरा की पर्याप्त प्रसिद्धि हुई। तथा हरिराम व्यास जैसे भी उनके प्रति श्रद्धा भाव व्यक्त करने लगे। , एक ऐसी मान्यता है कि मीराबाई के मन में के प्रति जो प्रेम की भावना थी, वह जन्म-जन्मांतर का प्रेम था। मान्यतानुसार मीरा पूर्व जन्म में की एक थीं। उन दिनों वह की प्रमुख सहेलियों में से एक हुआ करती थीं और मन ही मन भगवान कृष्ण को प्रेम करती थीं। इनका एक गोप से कर दिया गया था। विवाह के बाद भी गोपिका का कृष्ण प्रेम समाप्त नहीं हुआ। सास को जब इस बात का पता चला तो उन्हें घर में बंद कर दिया। कृष्ण से मिलने की तड़प में गोपिका ने अपने प्राण त्याग दिए। बाद के समय में के पास मेड़ता गाँव में 1504 ई.

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मीरा बाई का अति प्राचीन भज

मीरा का भजन

आपके आने से ही सारा दुःख मिटेगा. Subscribe Sonotek Cassettes Haryanvi channel for unlimited entertainment :- Like us on Facebook :- Circle us on G+ :- Follow us on Instagram :- Follow us on Twitter :- Follow us on Dailymotion :- Follow us on Pinterest :- Follow us on Tumblr :- Click Here Website :- Subscribe Our YouTube Channel to Stay Updated Latest Haryanvi Songs New Haryanvi Dj Songs New Haryanvi Songs New Haryanvi Songs Of 2019 Haryanvi Songs 2019 New Haryanvi Songs 2019 Haryanvi Songs Haryanvi Songs Haryanavi 2019. अपने पिया की मीरा, बनी रे जोगनीया। दोहा — कृष्णा थे भले आवजो, सरद पुनम री रेण, था बीन घड़ी अणि यावडे, मारा बीलखा लागे नैण। बीलखा लागे नैण, हीया मे लागि करोती, नैण रया जर नय, बीरे रा टपके मोती। अपने पिया की मीरा, बनी रे जोगनीया, आवो नी पधारो, मारा साँवरिया, मारा साँवरिया, मीरा बनी रे जोगनीया, अपने पीया की मीरा, बनी रे जोगनीया।। मनडे रो मोर थारा, दरशण खातर तरसे है, आँख क्यारा आँसु डा, सावण झु बरसे है, टप टप पलका सु नैण भरीया, हो कान्हा, टप टप पलका सु नैण भरीया, मीरा बनी रे जोगनीया, अपने पीया की मीरा, बनी रे जोगनीया।। घर रा लोग मने, बावरी बतावै, संग री सहेल्या मापे, आंगली ऊठावे, हसी ऊडावे नेना टाबरिया, हो कान्हा, हसी ऊडावे नेना टाबरिया, मीरा बनी रे जोगनीया, अपने पीया की मीरा, बनी रे जोगनीया।। सुख सारा छोडीया मैं, मोहन थारा कारणे, भगवा सा वेस करीया, आई थारे बारणे, छोड्या परिवार, छोड्या सासरीया, हो कान्हा, छोड्या परिवार, छोडीया सासरीया, मीरा बनी रे जोगनीया, अपने पीया की मीरा, बनी रे जोगनीया।। चाहे जितने दुख दे ले, चाहे तु परखले, एक बात मारी तू, कान खोल सुणले, तू है मोहन मैं तेरी जोगनीया, हो कान्हा, तू है मोहन मैं तेरी जोगनीया, मीरा बनी रे जोगनीया, अपने पीया की मीरा, बनी रे जोगनीया।। अपने पिया की मीरा, बनी रे जोगनीया, आवो नी पधारो, मारा साँवरिया, मारा साँवरिया, मीरा बनी रे जोगनीया, अपने पीया की मीरा, बनी रे जोगनीया।। स्वर — मोईनुद्दीन जी मनचला। प्रेषक — નારાયણ જાંઘીડ 6378473647. जब से आप मुझसे अलग हुए हैं, मेने कभी चैन नही पाया हैं. यह नाम मुझे प्राप्त होते ही दुनिया की अन्य चीजे खो गईं हैं. आप आकर मेरा दुःख दूर कर दीजिए.

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मीरां

मीरा का भजन

. कोई कहता हैं, खुल्लमखुला सबके सामने मोल लिया हैं. पीड़ा में कडवे शब्द तो होते ही नही हैं. भगवान् को प्राप्त करने के लिए भगवा वस्त्र धारण करना काफी नही हैं. तुझे इस धरती और आसमान के बिच जो कुछ दिखाई दे रहा हैं. आखिर में मीरा कहती हैं, प्रभु जब आप आकर मिलोगे तभी मेरी यह पीड़ा दूर होगी. मगर मेने यु ही नही लिया हैं.

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मीरा का बाजे एकतारा संतो की खड़ताल भजन लिरिक्स

मीरा का भजन

. कोई भी आवाज होती हैं तो मुझे लगता हैं आप आ रहे हैं, आपके दर्शन के लिए मेरा ह्रदय अधीर हो उठता हैं. इसका अंत एक दिन निश्चित हैं. अरे सखी मेने तो तराजू से तोलकर गुण अवगुण देखकर मौल लिया हैं. काटो जम की फांसी मीरा के पद का हिंदी अर्थ मीराबाई इस पद में कहती हैं कि हे मन तू कभी नष्ट ना होने वाले भगवान् के चरणों में ध्यान धरा कर. Meera Ke Pad का यह लेख आपकों अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और whatsapp और गूगल प्लस पर जरुर साझा करे.

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भजन

मीरा का भजन

गोकला राम वाहेलाण प्रभु पवार सिणधरी हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें गायक गोकला राम वाहेलाण भोमाराम पवार सिणधरी गोमाराम मायल होडु थानाराम मायल होडु बाबूराम टांक करना भूका मुनेश टांक करना भूका लक्ष्मण तंवर लूणाराम बरवड रतन गर्ग हमारे चैनल पर देसी भजन जरूर मिलेंगे आपको पसंद आए तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें वीडियो एडिटर थानाराम मायल होडु मोबाइल नंबर 7742411984. तुम्हारी दासी मीराँ के प्रभु गिरधर नागर! यह संसार चौसर के खेल की तरह हैं. जग में सबै खोवायो खरचै नहि चोर न लेवे, दिन-दिन बाधत सवायो सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तरी आयो मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, हरखि-हरखि जस गायों मीरा बाई के पद का अर्थ मीराबाई कहती हैं, मुझे राम रूपी बड़े धन की प्राप्ति हुई हैं. उनमे दर्द होने लग रहा हैं. इस नाम रूपी धन की यह विशेषता हैं कि यह खर्च करने पर कभी घटता नही हैं, न ही इसे कोई चुरा सकता हैं, यह दिन ब दिन बढता जाता हैं.

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मीरां बाई

मीरा का भजन

कोई कहे चान, कोई कहे चौड़े, लियो री बजता ढोल कोई कहै मुन्हंगो, कोई कहे सुहंगो, लियो री तराजू रे तोल कोई कहे कारो, कोई कहे गोरो, लियो री आख्या खोल याही कुं सब जग जानत हैं, रियो री अमोलक मोल मीराँ कुं प्रभु दरसन दीज्यो, पूरब जन्म का कोल Meaning of Meerabai pad मीरा बाई अपनी सखी से कहती हैं- माई मेने श्री कृष्ण को मोल ले लिया हैं. पल-पल भगवान् की प्रतीक्षा ही किये रहती हु. . मै तो लियो गोविन्दो मोल. इश्वर की प्राप्ति और जन्म म्रत्यु के चक्कर से मुक्ति. मेरे सद्गुरु ने कृपा करके ऐसी अमूल्य वस्तु भेट की हैं, उसे मैंने पुरे मनोयोग से अपना लिया हैं.

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मीराबाई का सुप्रसिद्ध भजन और कविता

मीरा का भजन

राग सोहनी अतः इस प्रकार वाणी का अध्ययन करने से यह ज्ञात होता है कि मीराबाई ने अपनी वाणी में , , और का पूर्णतया प्रयोग किया और इसे आध्यात्म का मार्ग बनाया, जो कि वर्तमान के लिए प्रेरणा है। मीराबाई ने '' को संजोए रखने में एक अनोखी कड़ी जोड़ दी, जिसका प्रमाण तथा पुष्टि विभिन्न ग्रन्थों के अवलोकन करने पर स्पष्ट होती है। अतः इस पद्धति को मीराबाई ने अपनाया और अपनी वाणी को संगीत के साथ जोड़कर आध्यात्म के साथ-साथ संगीत का भी प्रचार-प्रसार किया, साथ ही संगीत को जीवित रखने में भी अपनी सहमति तथा हिस्सेदारी पाई। फ़िल्म 'मीरा' 1979 के प्रसिद्ध गीतकार ने मीराबाई के जीवन पर आधारित एक फ़िल्म का भी निर्माण किया। गुलज़ार निर्मित और अपने समय की मशहूर अभिनेत्री द्वारा अभिनीत इस फ़िल्म में ने दिया था। विख्यात के रूप में पहचाने जाने वाले पण्डित रविशंकर ने कुछ गिनी-चुनी फ़िल्मों में ही संगीत दिया है, परन्तु जो दिया है, वह अविस्मरणीय है। पण्डित जी फ़िल्म में पार्श्वगायिका से मीरा के पदों को गवाना चाहते थे, परन्तु लता जी ने अपने भाई हृदयनाथ मंगेशकर के संगीत में मीरा के अधिकतर पदों को लोकप्रिय बना दिया था, अतः रविशंकर जी ने फ़िल्म में वाणी जयराम से मीरा के पदों का गायन कराया। फ़िल्म के सभी गीत विविध रागों पर आधारित थे। मृत्यु मीराबाई अपने युग से लेकर आज तक लोकप्रियता के शिखर पर आरूढ हैं। उनके गीत या भजन आज भी भाषी भारतवासियों के होठों पर विराजमान हैं। मीरा के कई पद हिन्दी फ़िल्मी गीतों का हिस्सा भी बने। वे बहुत दिनों तक , में रहीं और फिर चली गईं। जहाँ संवत 1560 ई. स्वयं को गिरधर नागर की दासी मानने वाली मीराबाई के पद, दोहे और भजन उनकी सच्ची मार्मिक भक्ति का काव्यात्मक रूप हैं. मीराबाई आगे कहती हैं- हे गिरधर नागर मै प्रसन्न हो होकर आपके गुण गाती हु. Meera Ke Pad Bhajan In Hindi इससे सबंधित आपके पास कोई जानकारी अथवा सामग्री हो तो कमेंट से हम तक जरुर पहुचाए. कोई काला कहता हैं तो कोई गोरा मगर मैने तो अपनी आँखों खोलकर यानि सोच समझकर गोविन्द को खरीदा हैं. कोई कहता हैं, तुमने सौदा महंगा लिया हैं तो कोई कहता हैं सस्ता लिया हैं.

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मीरा बाई का अति प्राचीन भज

मीरा का भजन

Download mp3 मीरा बाई का अति प्राचीन भज free! बाजी शाम को खत्म हो जाती हैं. School mein yah sab padha tha lekin aaj iska sachhe arthon ka gyan hota hai to achraj hota hai ki ham jise mahaj school mein achhe ank paane kee lalsa se ratte the unka aaj vastavik dharatal par kitna mahatva hai. उसे पाकर मुझे लगा मुझे ऐसी वस्तु प्राप्त हो गईं हैं, जिसका जन्म-जन्मान्तर से इन्तजार था. बस उनमे से यह नाम मूल्यवान प्रतीत होता हैं. . यदि इश्वर को प्राप्त करने की युक्ति नही अपनाई तो इस संसार में फिर से जन्म लेना पड़ेगा. और मुख से मीठे वचन निकलने लगते हैं.

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